अनकहीं बाते,,,,,,

*कुछ अनकही बातो से रिश्ता नहीं है मेरा,,,,,,,,,,,,,,,

*कुछ अल्फ़ाज अधूरे ही रह गए हैं मेरे,,,,,,,,,,,,,,,

*क्यु तुम ऐसे सता कर चले जाते हो फिर से मनाने के लिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*दिल को तु ही चाहये अपना बनाने के लिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*हर खुशी तुझसे ही तो है मेरी जिंदगी मै,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*बस एक आस चाहये तुझे मनाने के लिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*दिल का ये रिश्ता ख़तम ना होगा जिंदगी मै कभी,,,,,,,,,,

*पास ना हो हम रूहे तो एक दूसरे मै ही बसी है ना हमारी,,,,,,,,,,,,,,,,

*जिंदगी तुझसे शुरू है तुझसे पर ही ख़तम है,,,,,,,,,,

AAISHA GOUR,

2 thoughts on “अनकहीं बाते,,,,,,

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s