सुनसान रात,,,,,,,,,

*सुनसान रात कितना कुछ बोल देती है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*मगर सुनसान रात हर किसी की समझ मै नही आती,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*जिस तरह रात सुनसान और खामोश होती है इसी तरह कुछ लोगो की जिंदगी भी होती है,,,,,,,,,,,,

*जिसमे सिर्फ अंधेरा और खामोसिया ही होती है,,,,,,,, ,,,,,,,,,,

*जो हर कोई समझ नहीं सकता इस अंधेरी रात मै एक सकूने है जो मुझे बहुत पसंद है,,,,,,,,,,,,,,,,

*चारो तरफ खामोसी ही खामोसी होती है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*सुनसान रात बिन बोले ही बहुत कुछ बोल देती है,,,,,,,,,,,,,,,,,

26 thoughts on “सुनसान रात,,,,,,,,,

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