रोने की कोई वजह है भी नहीं,,,,,,,,,,,,,,

*रोने की कोई वजह है भी नही और वजह है भी,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*मगर एक दम से बैठे बैठे आँखों से आशु बहने लगे हैं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*मन इतना भारी हो रहा है की अगर किसी ने मजाक मै भी कोई बात बोल दी तो इन आँखों से एक बार फिर बरसात हो जायेगी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*जो बरसात पता ही नहीं कब तक रुके,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*ये आँखे जो छोटी छोटी बातो पर कभी भी बरस पड़ती है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*बहुत बार तो कोई वजह ना हो फिर भी आँखे बोल ही पड़ती है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*क्या है इन आँखों मै ऐसा जो ये थोड़ी देर भी खुद को बरसने से रोक नही पाती सारे बंधन तोड़ कर ये आँखे बरस जाती है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*इन आँखों से और इन आशुओ से एक खास और गहरा रिश्ता सा बन गया है,,,,,,,,,,,

*जो मरते दम तक टूटेगा नही,,,,,,,,,,,,,,,,,,

11 thoughts on “रोने की कोई वजह है भी नहीं,,,,,,,,,,,,,,

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