यू ही नहीं होती हाथ की लकीरों के आगे उंगलियाँ,,,,,,,,,,,,,

*यू ही नहीं होती हाथ की लकीरों के आगे उंगलियाँ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*रब ने भी किस्मत से पहले मेहनत लिखी है,,,,,,,,,,,,,,,,,

*मेहनत के बिना कुछ नहीं होता,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*हर काम मै पहले मेहनत करनी पड़ती है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*फिर कही जाकर कामयाबी मिलती हैं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*हर इंसान को पहले मेहनत की सीढ़ियों से गुजरना पड़ता है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*तब जाकर कामयाबी के रास्ते पर हम पोहचते है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*कामयाब होने के लिए केवल मेहनत ही एक ऐसा सोटकट रास्ता है जिस से गुजर कर हम कामयाबी की राह तय करते हैं,,,,,,,,,,,,,,,,

*यू ही नहीं होती हाथ की लकीरों के आगे उंगलियाँ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*रब ने भी किस्मत से पहले मेहनत लिखी है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

13 thoughts on “यू ही नहीं होती हाथ की लकीरों के आगे उंगलियाँ,,,,,,,,,,,,,

  1. Woww
    बहुत सही लिखा आपने

    बिन मेहनत नो मिले
    नही क़द्र कभी होती यहा
    मेहनत ही अहसास कराए
    हक दिखलाती अपना सदा।।

      1. हम भी कुछ लिखते हैं
        कहते उन्हें कहानिया हैं
        कभी हमारी धरा भी आइए
        अपने विचार प्रकट कीजिए।।
        अनाम जी

  2. नहीं
    कड़ी मेहनत

    विस्मय
    उपहार के बारे में
    अपने स्वयं के जीवन के सभी

    कदम दर कदम
    विनम्रता में

    कर रहे हैं और दे जाओ
    मौन अवस्था में
    निरंतर गति में

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